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बहन लौटी भारत, यूक्रेन में ही फंसा है भाई, घर पहुंचने पर पेरेंट्स ने बेटी को लगाया गले, मां ने कहा खुशी अधूरी

रूस और यूक्रेन के बीच जंग लगातार जारी है। अभी तक जंग किसी अंजाम तक नहीं पहुंची है। वैसे देखा जाए तो युद्ध तो यूक्रेन की धरती में लड़ा जा रहा है लेकिन इसकी गूंज पूरे विश्व भर में सुनाई पड़ रही है। युद्धग्रस्त यूक्रेन में लोग बहुत ज्यादा परेशान हैं। भारतीय लोग वहां पर फंसे हुए हैं, जिसके चलते उनके परिजनों को अपनों को लेकर काफी चिंता बनी हुई है। कई के घरों में चूल्हा नहीं जल रहा है। कई छात्र-छात्राओं की मोबाइल स्विच ऑफ हो गए हैं, जिससे उनसे संपर्क कर पाना संभव नहीं है।

ऐसे में यूपी के कानपुर में बेटी के युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौटने पर भी एक मां की खुशी अधूरी रह गई। जब बेटी अपने घर वापस आई तो मां ने उसे गले लगा लिया। उनके चेहरे पर बेटी के लौटने की खुशी थी परंतु आंखों में बेटे के यूक्रेन में ही छूटने का गम भी था। अक्षरा ने यह बताया कि 2 मार्च को खार्कीव पूरी तरह से खाली करने के आदेश दे दिए गए थे।

इसके बाद वह अपने भाई आरव के साथ बैग में सामान लेकर अन्य विद्यार्थियों के साथ रेलवे स्टेशन पर चली गई। रेलवे स्टेशन पर चारों तरफ भीड़ ही भीड़ लगी हुई थी। वहां पर भारतीय हजारों की संख्या में थे। इसके साथ यूक्रेनियन भी वहीं पर भारी संख्या में थे। जब ट्रेन आई तो उसके अंदर चढ़ने के लिए सभी धक्का-मुक्की करने लगे।

अक्षरा ने यह बताया कि किसी तरह भाई ने मेरी मदद की, जिससे अक्षरा और उनकी कुछ सहेलियां ट्रेन में चढ़ गई परंतु उनका भाई चढ़ ना सका। इसी बीच पुलिस ने हवाई फायरिंग कर दी, जिसकी वजह से वहां पर भगदड़ मच गई थी और ट्रेन भी चलने लगी। इसी भागदौड़ में आरव और अक्षरा का हाथ छूट गया और आरव रेलवे स्टेशन पर ही रह गया।

अक्षरा ने बताया कि उसके भाई आरव की हालत ठीक नहीं थी। कई किलोमीटर पैदल चलकर वह खार्कीव से 15 किलोमीटर दूर एक गांव में रुका, जहां 3 दिन तक फंसा रहा। शनिवार को भारतीय दूतावास ने बसे भेजकर उसे और अन्य छात्रों को वहां से निकाला। मधुरिमा ने यह बताया कि बेटा अभी बॉर्डर नहीं पहुंचा है। उसकी तबीयत ठीक नहीं है। वहीं अक्षरा का बताना है कि -7 डिग्री तापमान और भीषण सर्दी में बिना खाए पिए हम परेशानियों को सहते रहे थे। जब वह बॉर्डर पार कर गए तब उनको कुछ राहत प्राप्त हुई।

तुषार, प्रीति यादव और दिव्यम भी घर पहुंचे

रविवार को ही चकेरी लाल बंगला की रहने वाली खार्कीव मेडिकल विवि की एमबीबीएस सेकंड ईयर की छात्रा प्रीति यादव भी अक्षरा के साथ ही अपने घर वापस लौटी। प्रीति और अक्षरा एक साथ यूक्रेन से निकली और पोलैंड बॉर्डर पर भी एक दूसरे का हर मुश्किल घड़ी में साथ निभाया था। दामोदर नगर बर्रा निवासी डेनिप्रो मेडिकल विवि से एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष के छात्र दिव्यम तिवारी और उनके सहपाठी पनकी एफ ब्लॉक निवासी तुषार निगम भी शनिवार देर रात घर लौटे। जब उनके परिजनों ने अपने बच्चों को देखा तो खुशी से उन्हें गले लगा लिया और उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

दिव्यम के भाई अधिवक्ता शैलेंद्र के द्वारा यह बताया गया कि डेनिप्रो से समय रहते ही दिव्यम और तुषार निकल गए और सही सलामत रोमानिया बॉर्डर को पार कर लिया। शनिवार की सुबह वह वहां से दिल्ली पहुंच गए।

आपको बता दें कि सुमी मेडिकल विवि से एमबीबीएस छठे वर्ष की छात्रा नवाबगंज में मैनावती मार्ग निवासी कीर्ति मिश्रा अभी भी वहां पर फंसी हुई है। उनके पिता शिक्षक सुरेंद्र नाथ मिश्रा के द्वारा यह बताया गया कि सुमी विवि से निकलने का कोई साधन नहीं है। बच्चों को खार्कीव व कीव के बीच निकल कर आना होगा और इसी क्षेत्र में रूसी सेना लगातार हमला कर रहे हैं। खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं है। सड़के खराब हो गई है।

हालांकि भारत सरकार के प्रतिनिधि बच्चों को निकालने के लिए लगातार कोशिश में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बेटी से फोन पर बात की और उन्होंने उसका हौसला बढ़ाया और यह भरोसा दिलाया कि बहुत जल्द भारत उन्हें लेकर आएंगे।

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