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घरवालों की सुनी डाट, कपड़े की गेंद से बचपन में खेले, अब कमलेश नागरकोटी IPL में मचा रहे हैं धमाल

क्रिकेट प्रेमियों के अंदर क्रिकेट के प्रति दीवानगी कुछ अलग ही रहती है। जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं आईपीएल 2020 का 13वां सीजन शुरू हो चुका है और इस सीजन में ऐसे बहुत से युवा खिलाड़ी है जो अपनी प्रतिभा का जलवा दिखाने के लिए काफी उत्सुक हैं। इन युवा खिलाड़ियों ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत सी कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। काफी संघर्ष के बाद इन युवा खिलाड़ियों को आईपीएल में खेलने का अवसर प्राप्त हुआ है। इन्होंने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया और अपने शानदार प्रदर्शन से आईपीएल 2020 में लोगों का दिल जीत लिया। इन्ही युवा खिलाड़ियों में से एक नाम कमलेश नागरकोटी का भी आता है।

जी हां, अंडर-19 वर्ल्ड कप 2018 के विजेता रहे भारतीय टीम के तेज गेंदबाज कमलेश नगरकोटी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। विश्व कप में 150 की तेज रफ्तार से इन्होंने सभी बल्लेबाजों को परेशान कर दिया। इतना ही नहीं बल्कि भारत को फाइनल जिताने में उन्होंने अहम भूमिका भी निभाई थी। आपको बता दें कि कमलेश नागरकोटी अब आईपीएल में केकेआर (KKR) की तरफ से खेल रहे हैं।

जब आईपीएल के 12वें मैच में कमलेश नागरकोटी ने RR के खिलाफ खेला तो इन्होंने 1 ओवर में 2 विकेट चटकाए। अपने इस प्रदर्शन से इन्होंने हर किसी का दिल जीत लिया। आपको बता दें कि इस मैच में इन्होंने 2 ओवर में मात्र 13 रन दिए और 2 विकेट लिए। कमलेश नगरकोटी ने 5 बॉल पर 8 रन की पारी खेली थी और यह नाबाद रहे। कमलेश नागरकोटी ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है। काफी संघर्षों के बाद इनको यहां पर खेलने का मौका मिला है। आज हम आपको इनके जीवन से जुड़ी हुई कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

कपड़े की गेंद से बचपन में खेलते थे कमलेश नागरकोटी

आपको बता दें कि कमलेश नागरकोटी का जन्म 28 दिसंबर 1999 को बाड़मेर, राजस्थान में हुआ था। कमलेश को घर में प्यार से सभी लोग बिट्टू के नाम से बुलाते हैं। जब इनकी उम्र 4 वर्ष की थी तब इनका परिवार उत्तराखंड से राजस्थान में आकर बस गया था। जयपुर में ही कमलेश ने अपनी शिक्षा ग्रहण की थी। कमलेश को खेल का काफी शौक था। यह बचपन में क्रिकेट खेलना बेहद पसंद करते थे, इन्होंने बास्केटबॉल भी खेला है। कमलेश जब भी अपने गांव जाते थे तो वह घर के आंगन में ही क्रिकेट खेलने लगते थे। खेलते-खेलते कई बार मिट्टी के फर्श पर गड्ढे पड़ जाते थे, जिसकी वजह से इनको अपने घरवालों की डांट भी सुननी पड़ जाती थी। इनको क्रिकेट का इतना शौक था कि यह बचपन में कपड़े से बनी गेंद से क्रिकेट खेला करते थे।

कमलेश की दिलचस्पी देख परिवार ने क्रिकेट खेलने की दे दी इजाजत

स्कूल के दिनों से ही कमलेश क्रिकेट में काफी दिलचस्पी रखते थे, जिसको देखते हुए इनके परिवार वालों ने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट खेलने की अनुमति भी दे दी थी। आपको बता दें कि कमलेश ने जयपुर के एक क्रिकेट अकादमी में दाखिला ले लिया था। जब इनकी उम्र 13 वर्ष की थी तब इन्होंने U-14 के लिए ट्रायल दिया था परंतु इनका चुनाव नहीं हो पाया था। इनकी तेज गेंदबाजी पर कोच सुरेंद्र राठोर की निगाह पड़ी, तब कोच सुरेंद्र राठौर में कमलेश को क्रिकेट में अपना करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया था। कमलेश ने मैदान में खूब अभ्यास किया। अपनी तेज गेंदबाजी के बलबूते कमलेश under-16 राजस्थान की टीम में शामिल हुए थे, इसके बाद इनको अंडर-19 खेलने का अवसर मिला था। इनकी तेज गेंदबाजी को देखकर बल्लेबाज भी परेशान हो जाते थे। लगभग 150 की रफ्तार वाली गेंद को बल्लेबाजों के लिए खेलना बहुत कठिन हो जाता था।

कमलेश को 150 की रफ्तार से गेंदबाजी के बलबूते पर इनको वर्ष 2018 में अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की तरफ से खेलने का अवसर मिला था। जब भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से था तब इस मैच में कमलेश ने अपनी बेहतरीन गेंदबाजी से 29 रन देकर तीन विकेट लिए थे। अगले मैच में इन्होंने 3 मेडन ओवर फेंके। अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए कमलेश ने दो विकेट लिए। भारत को चैंपियन बनाने में कमलेश का बहुत बड़ा योगदान था। विश्व कप में कमलेश ने अपनी शानदार गेंदबाजी से छह मैच में 9 विकेट लिए। इनके अच्छे प्रदर्शन को देखकर भारतीय टीम के सभी दिग्गज खिलाड़ियों ने इनकी प्रशंसा की थी।

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