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अगर भाई हो दूर तो ऐसे मनाएं भाई दूज, जानिए पूजा के खास तरीकों के बारे में

भाई बहन का रिश्ता बहुत ही खास होता है। भाई-बहन के बीच की भावनाओं और प्यार को समझ पाना बहुत ही मुश्किल है। भाई-बहन एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं, एक-दूसरे के रक्षक भी होते हैं। यह दोनों एक-दूसरे से अपनी बातें शेयर भी करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि भाई-बहन एक दूसरे से बिना कोई शर्त ही प्यार करते हैं। वैसे देखा जाए तो ऐसे बहुत से विशेष दिन या अवसर होते हैं, जो भाई और बहन के बीच प्यार को मजबूत करने के लिए समर्पित है। इन्हीं में से एक भैया दूज सबसे अनोखा पर्व है।

भाई दूज रक्षाबंधन की तरह एक खास पर्व माना जाता है। यह मुख्य रूप से हिंदू धर्म के लोग मनाते हैं। भाई दूज का पर्व दिवाली के तीसरे दिन मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व भाई दूज कार्तिक शुक्ल की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक कर उसकी लंबी आयु की कामना के लिए पूजा करती है। ऐसी भी मान्यता है कि अगर भाई इस दिन बहन के घर पर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है तो उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है।

जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं इस समय देश भर में कोरोना महामारी का संकट मंडरा रहा है। ऐसे में छुट्टियों की कमी या फिर किसी अन्य कारण से भाई दूज के मौके पर भाई-बहन नहीं मिल पा रहे हैं तो आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। जी हां, दूर रहकर भी भाई दूज के इस पर्व को विधि-विधान पूर्वक मनाया जा सकता है।

ज्योतिष शास्त्र में इसे लेकर एक बहुत ही खास तरीके के बारे में जानकारी दी गई है। अगर इसका पालन करके भाई दूज की पूजा की जाए तो इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु की कामना का यह पर्व बिना किसी रूकावट के मना सकती हैं। 6 नवंबर 2021 को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। तो चलिए जानते हैं अगर भाई दूर हो तो ऐसे में किस तरह भाई दूज का पर्व मनाएं।

भाई दूर हो तो ऐसे करें पूजा

अक्सर देखा गया है कि भाई किसी दूसरे शहर या देश में काम करता है जिसके चलते वह भाई दूज पर नहीं आ पाता है। अगर भाई आपसे दूर है तो आप चिंता ना करें। आप एक खास तरीके के माध्यम से दूर रह रहे भाई के लिए भाई दूज की पूजा कर सकती हैं। सबसे पहले बहने सुबह उठकर स्नान करने के पश्चात पूजा की तैयारी कर लें।

स्नान करने के पश्चात आप नारियल के उतने गोले लीजिए जितने भाई आपसे दूर हैं। इसके बाद आप एक चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर गुलाबी रंग के फूल रख दीजिए और उसके ऊपर चावल रखें। इसके पश्चात इन पर नारियल के गोलों को स्थापित कर दीजिए। उसके बाद गंगाजल से गोलों को स्नान कराएं और उनका रोली, चावल से तिलक कीजिए। उन्हें मिठाई का भोग लगाएं। तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। इसके बाद गोलों की आरती उतारकर उन्हें पीले कपड़े से ढक कर रख दीजिए।

शाम के समय यह काम करें

अब आप चौकी के ऊपर जो आपने गोले रखे हैं उसको उसी स्थिति तक शाम तक रहने दीजिए। शाम के समय यमराज से अपने भाई की लंबी आयु की कामना कीजिए और अगले दिन उन गोलों को पूजा स्थान से उठाकर अपने पास रख लीजिए। जब भी भाई आपसे मिलने आए तो आप वह गोले उन्हें दे सकती हैं।

भाई दूज पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

दोपहर 01 बजकर 10 मिनट से लेकर 03 बजकर 21 मिनट तक यानी करीब 2 घंटे पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।

 

 

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