एग्जाम 1 नंबर बढ़वाने के लिए इस छात्र ने लड़ी 3 साल की जंग, बोर्ड नही माना तो कोर्ट ने दिलवाए अब इतने अंक

कई बार सोशल मीडिया के जरिए हमें कई ऐसी सारी खबरों के बारे में जानकारी मिलती है जिनके बारे में सुनकर हम खुद काफी ज्यादा हैरान रह जाते हैं. अभी हम आपको एक ऐसे ही हैरान कर देने वाली कहानी बताने जा रहे हैं. दरअसल मध्य प्रदेश के रहने वाले बारहवीं कक्षा के स्टूडेंट शांतनु ने अपनी मार्कशीट में एक नंबर बढवाने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल से लेकर हाई कोर्ट तक केस लड़ा. 3 साल बाद आखिरकार शांतनु को इंसाफ मिला और उनकी परीक्षा की कॉपी को दोबारा से चेक किया गया जिसके बाद शांतनु का एक नहीं बल्कि पूरे 28 नंबर बड़े. छात्र ने एक नंबर बड़वाने के लिए 40 से ज्यादा पेशिया लगाई थी और ₹15,000 खर्च किए थे.

जानकारी के लिए आप सभी लोगों को बता दें कि 12वीं का रिजल्ट आने के बाद शांतनु के 12वीं में 74.8 परसेंट नंबर आए थे. लेकिन वह इसे बिल्कुल भी खुश नहीं थे जिसके बाद शांतनु ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन उनका एक नहीं बल्कि पूरे 28 नंबर बढ़ा दिए गए. अपनी मार्कशीट में एक नंबर बढ़ाने के लिए इस छात्र ने 3 साल तक कड़ी मेहनत कर मंडल से लेकर हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और कभी हार नहीं मानी. जिसका परिणाम यह निकला कि शांतनु नाम के इस छात्र के एक नहीं बल्कि पूरे 28 नंबर मार्कशीट में बढ़ गए. इन 3 सालों में शांतनु कोर्ट में 40 बार तारीख लगी और इस पूरी प्रक्रिया में उनका ₹15000 का खर्च भी आया.

दृढ आत्मविश्वास से शांतनु ने जीती जंग

जानकारी के लिए आप सभी लोगों को बता दें कि शांतनु नाम के इस छात्र सागर के एक्सीलेंस स्कूल से 12वी क्लास की पढ़ाई की थी. 2018 में दी गई 12वीं की परीक्षा में सागर के 74.8% नंबर आए थे लेकिन अपने द्वारा की गई तैयारी पर छात्र को पूरा भरोसा था कि उनके नंबर 75 से 80 परसेंट के बीच में आने वाले हैं लेकिन एक नंबर की वजह से शांतनु नाम का यह छात्र 75 परसेंट नंबर पर नहीं कर पाया. जिसके चलते यह छात्र सीएम मेधावी योजना से वंचित रह गया. अब शांतनु के 28 नंबर बढ़ने से उनके नंबर पूरे 80 परसेंट हो जाएंगे. जिसके बाद अब उनको सीएम मेधावी योजना का लाभ मिल पाएगा. जल्द ही शांतनु इस योजना का लाभ उठाने के लिए इसके लिए फॉर्म भरेंगे. जानकारी के लिए आप सभी लोगों को बता दें कि शांतनु के माता-पिता नहीं है 2010 में उनके माता-पिता इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गए थे वह चार बहनों के इकलौते भाई हैं.

इस पूरे मामले पर शांतनु का कहना है कि कोरोना काल के चलते पूरे 2 साल तक उनके इस मामले पर कोई भी सुनवाई नहीं हुई. जब मामले पर सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट द्वारा बोर्ड को 6 नोटिस दिए गए. लेकिन बोर्ड की तरफ से अपना कोई भी पक्ष नहीं रखा गया. इसके बाद कोर्ट के कहने पर शांतनु ने रिटोटलिंग के लिए अप्लाई किया लेकिन फिर भी उनका एक नंबर भी नहीं बढ़ा. जिसके बाद अप्लाई किए गए सब्जेक्ट की कॉपी निकलवाई गई और देखा गया कि उनके द्वारा यह गए जवाब सही है.लेकिन उनको उसके नंबर नहीं दिए गए. इसके बाद कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा केंद्र को एक बार फिर से मूल्यांकन करने का आदेश दिया और इस बार शांतनु के नंबर बढ़ गए और अब उनकी मार्कशीट में उनके नंबर 81 परसेंट हो चुके हैं.